सब कुछ पहले जैसा नही रहा ना
- Admin

- Feb 4, 2021
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सब कुछ पहले जैसा नही रहा ना| लगता है तुम्हारी तरह ये जग़ह भी अनजान सी हो गयी है| वो कोने में पड़ी हमारी सीट भी रूठी सी लगती है, मानो कह रही हो जैसे, अब याद आयी तुम्हे मेरी, तुम भी तो कभी यूँ ही डाँटा करती थी मुझे, हाँ, इसी कोने वाली सीट पर बैठकर और मैं हर बार कान पकड़कर, मासूम सा
चेहरा बनाकर तुम्हे मना लिया करता|
याद है तुम्हे वो दिन, जब पहली बार दोस्तों से छिपते छिपाते इसी रेस्टोरेंट में आये थे| शायद पहली डेट थी वो अपनी और मैं डरते डरते तुम्हारा हाथ चुपके से पकड़ा था|ना जाने कितने बार अपने ज़ेहन में तुम्हारे हाथों को थामा होगा। मगर फिर भी एक डर था असल ज़िन्दगी ऐसा करने का| डर, की कहिं ये दोस्त, दोस्त भी ना रह पाए| उस दिन मुझे पता चला कि तुम बस दोस्त नहीं| जब तुमने भी शर्माते हुए, मेरी अँगुलियों को थामा था| बहुत खुश हुआ था मैं उस दिन, ऐसा लगा ज़िन्दगी का अधूरा सपना पूरा हो गया हो|
तुमसे हर बार मिलना पहली बार जैसे ही हुआ करता था| इतनी सारी बातें हुए करती थी अपने पास की कब अपनी कॉफी खत्म हो जाया करती थी पता ही नहीं चल पाता था| वक़्त का कभी पता ही नहीं ही चल पाता था तुम्हारे साथ, ना जाने कब गुज़र जाया करता था|
हाँ सब याद है हमे और शायद इस कोने वाली सीट को भी तभी तो ये आज भी रूठी है, मेरी तरह| इसके भी वो ही सवाल है जो मेरे है की क्या खता थी मेरी जो मुझसे यूँ बिन बताये दूर चली गयी| प्यार तो था ना अपने बीच, तो क्या मैं ये जानने के काबिल भी नहीं था, तुम्हारा मुझसे दूर जाने की वज़ह| क्या इतना बुरा था मैं?
अब इतने सालों बाद क्यूँ याद आयी मेरी|अब तो तुम्हारी मुस्कान भी झूठी सी लगती है मुझे, तुम्हारी बातें, जिससे कभी सारे ग़म भूल जाया करता था| आज ना जाने क्यूँ मेरे गमों को उजागर कर रहा है|
हाँ, तुम तोह आयी, मग़र मैंने जिससे प्यार किया था, वो शायद उसी समय के भवर में खो गयी।
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